मत पूछ हुआ क्या क्या
संजय द्विवेदी
संजय द्विवेदी
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शारदा प्रकाशन
शारदा कुंज, आजाद नगर, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
शारदा प्रकाशन
शारदा कुंज, आजाद नगर, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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कॉपीराइट
कॉपीराइट
संजय द्विवेदी
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प्रथम संस्करण
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प्रथम संस्करण
जून 2003
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संपादन सहयोग और संकलन
संपादन सहयोग और संकलन
विश्वेश ठाकरे
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वितरक
श्री बुक डिपो हाईकोर्ट रोड, बिलासपुर (छग) -4955004
फोन 05542-284691
वितरक
श्री बुक डिपो हाईकोर्ट रोड, बिलासपुर (छग) -4955004
फोन 05542-284691
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आवरण चित्ररेखांकन
नारायण राव द्वारा , अप्पाराव, वायरलेस कालोनी,
क्वार्टर नं. -1173/3, एस. ई. सी. रेल्वे, बिलासपुर (छ. ग. )
फोन 07752-233258
आवरण चित्ररेखांकन
नारायण राव द्वारा , अप्पाराव, वायरलेस कालोनी,
क्वार्टर नं. -1173/3, एस. ई. सी. रेल्वे, बिलासपुर (छ. ग. )
फोन 07752-233258
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आवरण पृष्ठ एवं मुद्रक
दिलीप खोब्रागड़े
‘लिपि ग्राफिक्स’, इंदिरा कालोनी, तारबाहर, बिलासपुर (छ। ग। )
फोन 07752-22333582
आवरण पृष्ठ एवं मुद्रक
दिलीप खोब्रागड़े
‘लिपि ग्राफिक्स’, इंदिरा कालोनी, तारबाहर, बिलासपुर (छ। ग। )
फोन 07752-22333582
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मूल्य : रूपये 80/-
मूल्य : रूपये 80/-
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0समर्पण0
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रचनाओं का अनुक्रम
चुनावी महाभारत से पहले
नहीं मिलेगी नौकरी
लाल-पीली बत्तियों के बिना
प्रतीक्षित है सामाजिक बदलाव का एक आंदोलन
आंखो में तैरते सपने
हैलो, आपको क्यों नहीं दिखता वाड्रफनगर ?
राजनीतिक वियाबान से वापसी की तड़प
तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी
इस भस्मासुर से कौन लडेगा ?
भोगी तो सत्ता बनाती है वरना हर कोई त्यागी है
कब पिघलेगी बर्फ
अंधेरे में बुद्ध !
कौन रोकेगा बाजार का ‘अश्वमेघ’
अपसंस्कृति एवं उपभोक्तावाद के प्रवक्ता
‘हिंदुस्तानी कौम’ की जबान
सिर्फ नरमुंडों की गिनती नहीं लोकजीवन का आइना भी
काजल की कोठरी से बेदाग लौटें कैसे ?
हमेशा चिंता के केंद्र से बाहर रहे हैं किसान
सपनों को सच करने की जिम्मेदारी
जिद को जिंदा रखने का जुनून
जिद और जिजीविषा ने दिलाई जगह
व्यावहारिक मोहब्बतें और मौखिक नफरतें
इस पौरुषपूर्ण समय में
चिंता के केंद्र से बाहर हैं बच्चे
इस जंग में जीत कमजोर की होगी
सत्ता के मैनेजरों व नैतिकता के पहरेदारों की रस्साक...
फिर ठगी गई मुस्लिम महिलाएँ
राजनाथ सिंह की ताजपोशी का अर्थ
इस रथ को कौन रोकेगा ?
बंगारू के ‘मुस्लिम प्रेम’ पर यह हाहाकार क्यों ?
जारी रहेगा यह भरतमिलाप !
लड़ाई अमानवीय जाति प्रथा के खिलाफ हो
जीतने का जुनून जगाएगा
निर्बल का बल बनाने की ताकत
निर्बल का बल बनाने की ताकत
नहीं मिलेगी नौकरी
लाल-पीली बत्तियों के बिना
प्रतीक्षित है सामाजिक बदलाव का एक आंदोलन
आंखो में तैरते सपने
हैलो, आपको क्यों नहीं दिखता वाड्रफनगर ?
राजनीतिक वियाबान से वापसी की तड़प
तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी
इस भस्मासुर से कौन लडेगा ?
भोगी तो सत्ता बनाती है वरना हर कोई त्यागी है
कब पिघलेगी बर्फ
अंधेरे में बुद्ध !
कौन रोकेगा बाजार का ‘अश्वमेघ’
अपसंस्कृति एवं उपभोक्तावाद के प्रवक्ता
‘हिंदुस्तानी कौम’ की जबान
सिर्फ नरमुंडों की गिनती नहीं लोकजीवन का आइना भी
काजल की कोठरी से बेदाग लौटें कैसे ?
हमेशा चिंता के केंद्र से बाहर रहे हैं किसान
सपनों को सच करने की जिम्मेदारी
जिद को जिंदा रखने का जुनून
जिद और जिजीविषा ने दिलाई जगह
व्यावहारिक मोहब्बतें और मौखिक नफरतें
इस पौरुषपूर्ण समय में
चिंता के केंद्र से बाहर हैं बच्चे
इस जंग में जीत कमजोर की होगी
सत्ता के मैनेजरों व नैतिकता के पहरेदारों की रस्साक...
फिर ठगी गई मुस्लिम महिलाएँ
राजनाथ सिंह की ताजपोशी का अर्थ
इस रथ को कौन रोकेगा ?
बंगारू के ‘मुस्लिम प्रेम’ पर यह हाहाकार क्यों ?
जारी रहेगा यह भरतमिलाप !
लड़ाई अमानवीय जाति प्रथा के खिलाफ हो
जीतने का जुनून जगाएगा
निर्बल का बल बनाने की ताकत
निर्बल का बल बनाने की ताकत
-विकृतियाँ का सुपर बाजार
-आभिजात्यवादी राजनीति का विस्तारवादी चेहरा
-छंट जाएंगे निराशा और अवसाद के बादल
-प्रतीक्षित है विकास की ‘गंगा’ लाने वाला ‘भागीरथ’
-कांउसिल में बहुत सैय्याद, मस्जिद में फकत जुम्मन
-यह दर्द लाइलाज
-बाजार की मार से बेजार हैं किताबें
-आर्थिक बदहाली सबसे बड़ी चुनौती
-कब मिलेगी राजनीतिक अस्थिरता से निजात ?
-सवाल है कि इस चुनौती से जूझेगा कौन ?
-चौथे पाए पर विदेशी निगाहें
-संस्कृति के क्षेत्र में बाजार की भाषा मत बोलिए
-संचार प्रौद्योगिकी का बाजार
-दरकती आस्थाओं और मोहभंग का बरस
-प्रलयंकारी बाढ़ के कारण खोजना जरुरी
-विश्व भाषा बनेगी : हिन्दी
-कौन लेगा खबरपालिका की बदहाली की खबर ?
-आभिजात्यवादी राजनीति का विस्तारवादी चेहरा
-छंट जाएंगे निराशा और अवसाद के बादल
-प्रतीक्षित है विकास की ‘गंगा’ लाने वाला ‘भागीरथ’
-कांउसिल में बहुत सैय्याद, मस्जिद में फकत जुम्मन
-यह दर्द लाइलाज
-बाजार की मार से बेजार हैं किताबें
-आर्थिक बदहाली सबसे बड़ी चुनौती
-कब मिलेगी राजनीतिक अस्थिरता से निजात ?
-सवाल है कि इस चुनौती से जूझेगा कौन ?
-चौथे पाए पर विदेशी निगाहें
-संस्कृति के क्षेत्र में बाजार की भाषा मत बोलिए
-संचार प्रौद्योगिकी का बाजार
-दरकती आस्थाओं और मोहभंग का बरस
-प्रलयंकारी बाढ़ के कारण खोजना जरुरी
-विश्व भाषा बनेगी : हिन्दी
-कौन लेगा खबरपालिका की बदहाली की खबर ?
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प्रस्तुति-सृजन-सम्मान, छत्तीसगढ़